शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा अपनी 16 कलाओं से पूर्ण होता है, मान्यता है इस रात चंद्रमा की रोशनी से अमृत बरसता है। यही कारण है कि ठाकुर बांकेबिहारी समेत सभी मंदिरों में शरद पूर्णिमा की रात ठाकुरजी महरास की मुद्रा में वंशी बजाते हुए चंद्रमा की रोशनी में भक्तों को दर्शन देते हैं। लेकिन, इस साल पड़ रहे चंद्रग्रहण के कारण इस दिव्य दर्शन का लाभ भक्तों को नहीं मिल सकेगा। ठाकुर बांकेबिहारी समेत तीर्थनगरी के हर मंदिर, आश्रम और घरों में चंद्रमा की धवल चांदनी में ठाकुरजी को श्वेत धवल पोशाक में महारास की मुद्रा में विराजित करके दर्शन होते हैं। ठाकुरजी के सामने खीर रखी जाती है, इस खीर पर सोलह कलाओं से परिपूर्ण चंद्रमा की रोशनी जब खीर पर पड़ती है, तो अमृत समान हो जाती है। आयुर्वेद में भी इसके लाभ बताए गए हैं। चंद्रमा की रोशनी में रखी गई ये खीर दमा रोगियों के लिए अमृत समान होती है।
