हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
लाड़ली जी मंदिर के प्रबंधन ने गोवर्धन एसडीएम को पत्र लिखा, कार्रवाई की मांग
बरसाना। लाडली जी मंदिर बरसाना के रिसीवर रास बिहारी गोस्वामी ने उप जिलाधिकारी गोवर्धन को लिखे पत्र में अवगत कराया है कि मंदिर के आसपास अवैध रूप से कई दुकानदार अपनी दुकान लगाकर बैठ जाते हैं। कोई फूल बेचने के बहाने तो कोई खिलौने बेचने के बहाने बैठते हैं, लेकिन उनकी नजर तीर्थ यात्रियों की जेब पर रहती है। वह जबरिया अपना सामान बेचने के बहाने तीर्थ यात्रियों से बदसलूकी करते हैं। आये दिन झगड़े होते हैं। मंदिर प्रबंधन की ओर से पुलिस को शिकायत की गई। पुलिस ने भी कई बार उनको खदेड़ा लेकिन फिर दुकान लगा कर अवैध रूप सेव बैठ जाते हैं।
एक बार दिल्ली की एक युवती के जबरदस्ती माथे पर तिलक लगाने के बहाने उसकी मांग भर दी थी। युवती रोने लगी थी। इस घटना से काफी बड़ा बवाल हुआ था। इसी तरह ये अतिक्रमणकारी आए दिन झगड़ा करते हैं। इनसे मंदिर प्रबंधन परेशान होता है। आए दिन मंदिर प्रबंधन को बदनामी झेलनी पड़ती है।
श्री गोस्वामी ने प्रशासन से कहा है कि इन्हें खदेड़ा जाए और मंदिर प्रशासन से अनुमति लेकर ही दुकान लगवाई जाएं। ऐसे लोगों का चरित्र वेरिफिकेशन कर उन्हें ही अनुमति दी जाए।
बरसाना में जयपुर मंदिर से राधारानी मंदिर तक उद्यान क्षेत्र की भूमि पर भी अतिक्रमण है। एक बार एसडीएम ने संज्ञान लेते हुए कार्यवाही के आदेश कर दिये। क्षेत्र के उद्यान प्रभारी ने भी कुछ दिन पूर्व एसडीएम को शिकायत करते हुए कहा था कि जयपुर मंदिर से राधारानी के मंदिर तक के मार्ग और उद्यान की जमीन पर ढकेल, रिक्शा, खोखे वालों ने अतिक्रमण कर लिया है।
कई छोटे दुकानदार प्लास्टिक की शीट बिछाकर रास्ते में बैठ जाते हैं, इससे मंदिर जाने वाले श्रद्धालुओं और राहगीरों को मुश्किल होती है। कई बार पुलिस के सहयोग से अतिक्रमण हटाया भी गया है लेकिन अतिक्रमणकारियों के हौसले इतने बुलंद हो गये हैं कि प्रशासनिक कार्यवाही को ही अगले दिन अंगूठा दिखा देते हैं।
अधिशासी अधिकारी नगर पंचायत और प्रभारी निरीक्षक बरसाना थाना को अतिक्रमण हटाने के आदेश की बार दिए गये हैं।
अतिक्रमण के चलते जयपुर मंदिर से श्रीजी राधा रानी मंदिर तक परिक्रमा मार्ग अवरूद्ध रहता है जिससा परिक्रमार्थियों को परेशानी होती है, अतिक्रमण के चलते जाम लग जाता है जिससे परिक्रमार्थियों को परेशानी होती है और दुर्घटना की संभावना बनी रहती है।
7455095736
Author: Vijay Singhal
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