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पैसा नहीं मिलने से ठेकेदार परेशान और बंदरों की मौज

ByVijay Singhal

Oct 1, 2023
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हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। मथुरा-वृंदावन में उत्पाती बंदरों को पकड़ने के लिए शुरू किया गया अभियान डेढ़ माह बाद ही दम तोड़ गया है। नगर निगम की ओर से संबंधित ठेकेदार को अब तक भुगतान नहीं किए जाने से बंदर पकड़ने से हाथ झाड़ लिए हैं। अब कहीं भी पिंजरा नहीं लगाया जा रहा है। करीब एक माह तक चले अभियान के तहत तीन हजार के आसपास बंदर पकड़े गए थे। अभियान बंद होने से बंदरों की भी मौज हो गई है। कहीं भी पिंजरा नहीं दिखने से वे भी खुलकर धमा-चौकड़ी कर रहे हैं। मथुरा-वृंदावन में बंदरों के उत्पात से देश भर के लोग परिचित हैं। संसद में भी इस मुद्दे को उठाया जा चुका है। इनके हमले से जनपद में अनेक लोग जान गंवा चुके हैं। कई जगह मकानों के छज्जे गिराने से हादसे हुए। आए दिन खंभों को झुका रहे हैं। बड़े होर्डिंग तक गिर चुके है। इन सबसे निजाते दिलाने के लिए नगर निगम ने उत्पाती बंदरों को पकने का अनुबंध छाता के इमरान के साथ किया। अभियान की शुरुआत वृंदावन से की गई, लेकिन बंदरों ने यहां ठेकेदार को ही छका दिया। ऐसे में नगर निगम के दिशा निर्देशन में उसने अपने पिंजरे मथुरा के चौबिया पाड़ा में लगा दिए। कभी बरसात तो कभी पर्वो के कारण अभियान बीच-बीच में बंद होता रहा। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के बाद फिर शुरू पिंजरे लगाए, लेकिन अब कहीं नहीं लगाए जा रहे हैं। ठेकेदार इमरान ने अब तक पकड़े गए बंदरों का अनुंबंध के मुताबिक भुगतान न होने की स्थिति में काम रोक दिया है। उसे महज 97 हजार का भुगतान किया गया है, जबकि दो लाख रुपये नगर निगम पर बकाया है। इमरान ने बताया कि बंदर पकड़ने के कार्य में 10 कर्मचारी, दो टेंपों और एक छोटा हाथी का उपयोग होता है। बंदरों के खान-पान पर भी खर्च होता है। इस तरह प्रतिदिन 12 से 15 हजार रुपये का खर्च आता है, लेकिन समय पर भुगतान न होने के कारण फिलहाल काम रोक दिया है। अपर नगर आयुक्त अनिल कुमार ने बताया कि पिछले तीन दिन से बंदर पकड़ने का अभियान बंद है। ठेकेदार को कुछ भुगतान कर दिया गया है। बाकी भी जल्द कर दिया जाएगा। चौबियापाड़ा रहा बंदर पकड़ने का केंद्र मथुरा-वृंदावन में बंदरों को पकड़ने की शुरुआत वृंदावन में श्रीबांकेबिहारी मंदिर क्षेत्र के आसपास की गई। इसके बाद निगम के अधिकारियों ने श्रीगोविंद देवजी मंदिर और नगर निगम कार्यालय के आसपास पिंजरे रखवाए। चार-पांच दिन बाद ही यहां अभियान असफल हो गया। ठेकेदार को मथुरा भेज दिया गया। इसके बाद इस अभियान की शुरुआत चौबियापाड़ा क्षेत्र से की गई। यहां बड़ी संख्या में बंदर पकड़े गए। सदर में भी एक-दो दिन बंदरों को पकड़ा गया।
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Vijay Singhal
Author: Vijay Singhal

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