हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज़ चीफ विजय सिंघल
मथुरा। आधुनिक भारत में आजादी के सात दशक बाद भी हम शुद्ध वर्षाजल को संरक्षित रखने में असफल हो रहे हैं या अधिकारियों की उदासीनता और कार्य शैली जिम्मेदार है है,यह आज जनमानस के लिए यक्ष प्रश्न के समान सामने है।
तीनों लोक से न्यारी मथुरा पुरी बृजमंडल तीर्थ क्षेत्र में उत्तर भारत के बड़े भूभाग को सिंचित करने वाली यमुना नदी, मथुरा पुरी में श्री कृष्ण की महारास लीला की अधिष्ठात्री देवी के रूप में योगीराज श्री कृष्ण की पटरानी के रूप में पूज्य हैं, मथुरा पुरी पुण्य तीर्थ विश्राम घाट श्री यमुना महारानी का एकमात्र तीर्थ स्थल है।
प्रतिदिन देश-देशांतर से हजारों श्रद्धालु मां यमुना महारानी के दर्शन, पूजन, अर्चन और स्नान के लिए मथुरा पुरी आते हैं।
चातुर्मास में इन श्रृद्धालुओ की संख्या लाखों में पहुंच जाती है।
सनातन संस्कृति में गंगा यमुना के प्रति जनमानस में अपार श्रद्धा का भाव सदैव रहता है,और जब इन आस्थाओं पर अधिकारियों की उदासीनता से कुठाराघात होता है तो केंद्र से लेकर प्रदेश और स्थानीय प्रशासन कटघरे में खड़ा नजर आता है और शायद किसी के पास कोई जबाब नहीं होता है। आज विडंबना है कि अरबों रूपए की लागत से बनाएं गये बैराज भी शुद्ध जल को संरक्षित रखने में असफल रहते हैं। यही हाल आज पुनः मथुरा पुरी के घाटों पर नजर आया,जब मथुरा में ब्रज दर्शन और मथुरा पुरी बृजमंडल चौरासी कोस तीर्थ यात्रा के लिए हजारों श्रद्धालु मथुरा के यमुना घाटों पर स्नान करने के लिए आ रहा है तो यमुना जल की स्थिति देखकर उसकी भावनाएं आहत हो रही है, स्नान घाट से पानी ही गायब है,अपार गंदगी और घुटनों कीचड़ देखकर हतप्रद रह जाता है और सोचता है कि मोदी, योगी,युग में यमुना की इस स्थिति के लिए कौन जिम्मेदार है। बृज पर्यावरण संरक्षण परिषद के अध्यक्ष एवं एन जी टी में याचिकाकर्ता तीर्थ पुरोहित माथुर चतुर्वेदी समाज के सरदार कान्तानाथ चतुर्वेदी का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट,एन जी टी के आदेशों को दरकिनार कर कार्य करना अधिकारियों की आदत हो गई है, प्रशासनिक अधिकारियों की घोर लापरवाही से जनभावनाओं के साथ निरंतर खिलवाड़ हो रहा है। बृज पर्यावरण संरक्षण परिषद के महामंत्री रामदास चतुर्वेदी निवर्तमान पार्षद का स्पष्ट कहना है कि हर कार्य की मौनेटरिंग माननीय प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री आकर नहीं करेंगे, स्थानीय जनप्रतिनिधियों को भी इस विषय का अधिकारियों से गम्भीरता पूर्वक संज्ञान लेना चाहिए। रामदास चतुर्वेदी का तो यह भी कहना है कि सात दशक बाद भी अधिकारियों की कार्यशैली में परिवर्तन नहीं है,आज भी इनकी सोच अंग्रेजो जैसी है कि हम शासक है और जनता पर शासन करना है,जनभावनाओ,व धार्मिक भावनाओं से इनका कोई सरोकार नहीं है, शायद कहीं यह कोई सोची समझी चाल तो नहीं योगी, मोदी के खिलाफ,कि गत माह सामान्य स्तर से लगभग 25/ 30 फुट तक ऊंचाई पर रहने वाला जलस्तर इतनी जल्दी सामान्य स्तर से तीन चार फुट नीचे चला गया,इसे लापरवाही समझा जाए या तकनीकी विफलता या अदूरदर्शिता कहा जाए, जबकि स्थानीय प्रशासन को यह अवगत रहता है कि मथुरा पुरी के प्राचीन घाटों पर यमुना जल स्तर का विषय कितना संवेदनशील रहता है उसके बाद भी शुद्ध जल को सहेजकर, संरक्षित रखने में प्रशासन फेल क्यों रहा । तीर्थ पुरोहित सूर्यकांत चतुर्वेदी का कहना है गत माह यमुना के सुंदर स्वरूप का दर्शन कर हजारों श्रद्धालुओं ने मथुरा पुरी दर्शन करने का निश्चय किया और जब आज वह मथुरा पुरी आ रहे हैं तो अपने आप को ठगा सा महसूस कर रहे हैं। यमुना तट पर पितृ तर्पण विधि कराने वाले पुरोहित चंद शेखर सौनू पंडित जी गणेश मंदिर का कहना है कि पौराणिक मान्यताओं के अनुसार गया तीर्थ क्षेत्र में पिण्ड दान और तर्पण करने से अधिक फल मथुरा पुरी में तर्पण आदि करने से मिलता है, लेकिन घाटो पर यमुना जल न होने और निरंतर, प्रदूषण युक्त पानी आने से स्थिति कष्टदायक हो रही है, इतनी बाढ़ के बाद भी शुद्ध जल संरक्षित न रखना घोर उदासीनता, लापरवाही ही है। वास्तविकता यही है कि स्थानीय प्रशासन के पास इसका कोई जवाब नहीं है । अधिकारियों की उदासीनता, जनभावनाओं, धार्मिक आस्थाओं और देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के स्वच्छ भारत अभियान, माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के सुंदर उत्तर प्रदेश, स्वच्छ तीर्थ स्थल,सदानीरा हमारी सांस्कृतिक विरासत की धरोहर यमुना गंगा सब पर भारी है। यदि ऐसे ही हालात रहते हैं तो यह विषय बहुत विचारणीय है। आज कि घाटो पर जलस्तर की स्थिति स्थानीय निवासियों के साथ हजारों श्रद्धालुओं के लिए कष्टदायक दर्शित हो रही है,और प्रशासनिक अधिकारी मौन है।
