हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। पोषण माह के अंतर्गत जनजागरूकता हेतु आज आंगनबाड़ी केन्द्रों पर अन्नप्राशन कार्यक्रम का आयोजन किया गया ।अन्नप्राशन कार्यक्रम के आयोजन का मुख्य उद्देश्य माताओं को इस बात के लिए जागरूक करना है कि छह माह का होने के बाद बच्चों को दूध के साथ उपरी खाद्य पदार्थ देने की शुरुआत समय से कर दी जाए। अन्नप्राशन कार्यक्रम उन बच्चों का कराया जाता है जिनकी आयु छह माह पूरे हो चुके हैं ।आंगनवाड़ी केंद्र पर बच्चे की माता ,दादी सहित परिवार के सभी सदस्यों एवं अन्य अगर होती धात्री महिलाओं को आमंत्रित किया गया ।बच्चे को माँ अथवा दादी की गोद में बैठाकर ,टीका लगाकर खीर खिलाकर उसका अन्नप्राशन संस्कार किया गया ।बच्चों को उपहार स्वरूप खिलौने एवं अन्य वस्तुएँ भी दी गई ।उपस्थित महिलाओं को जानकारी दी गई कि माँ का दूध अमृत के समान है इसलिए जन्म के तुरंत बाद स्तनपान कराना शुरू करें किंतु छह माह के पश्चात बच्चे को ऊपरी खाद्य पदार्थ देना बहुत ज़रूरी है ॥क्योंकि इस समय बच्चे के शरीर और मस्तिष्क का तेज़ी से विकास हो रहा होता है ।केवल माँ के दूध से बढ़ते हुए बच्चे के शरीर की और मस्तिष्क की सभी आवश्यकताएं /पौष्टिक तत्व पूरे नहीं होती है ।इसलिए ऊपरी खाद्य पदार्थ देना भी ज़रूरी है ।इस आयु में बच्चे के मुँह में दाँत नहीं होते हैं और बच्चे का पाचनतंत्र भी बहुत अधिक विकसित नहीं होता है इसलिए ऐसे खाद्य पदार्थ दिए जाने चाहिए जिनको बच्चा आसानी से निगल सके और वह पचने में भी आसान हो ।जिन्हें हम अर्द्ध ठोस खाद्य पदार्थ कह सकते हैं जैसे,मसला हुआ क़ेला,दाल का पानी ,चावल का माड ,सूची की पतली खीर ,सूजी का पतला हलवा ,ख़ूब घुटी हुई खिचड़ी मसला हुआ केला इत्यादि बच्चे को दे सकते हैं । बच्चे के खाने में ऊपर से थोड़ा घी /तेल डाल देना फ़ायदेमंद रहता है ।शुरू में बच्चे को थोड़ा सा खिलाना चाहिए ,उसके बाद धीरे धीरे इसकी मात्रा बढ़ानी चाहिए ।ऐसा करना बहुत ही ज़रूरी है । धातरी महिलाओं में अधिकतर ऊपरी आहार के प्रति जागरूकता का अभाव है ।माताएँ बच्चों को दूध पिलाना सबसे अधिक अच्छा समझती है इसलिए वह लंबे समय तक बच्चे को केवल दूध ही पिलाती रहती है जिसके कारण एक ओर जहाँ बच्चे का विकास प्रभावित होता है वहीं दूसरी ओर बच्चे को विभिन्न खाद्य पदार्थों के स्वाद का पता नहीं चल पाता और विभिन्न खाद्य पदार्थों के प्रति उनकी रुचि विकसित नहीं हो पाती है ।इसलिए ही ज़्यादातर बच्चे हरी सब्ज़ियां खाना नापसंद करते हैं । आंगनबाड़ी कार्यकर्ता द्वारा माताओं को बताया गया कि खिचड़ी में या दाल में कद्दू ,लौकी या हरी पत्तेदार सब्ज़ियां डालकर पकाया जाए और उसके बाद उनको अच्छी तरह से मिलाकर बच्चे को प्यार से खिलाया जाए तो बच्चे दिए धीरे सभी चीज़ें खाने लगेंगे ।यदि बच्चे को समय से और समुचित मात्रा में ऊपरी आहार दिया जाय तो बच्चे की लंबाई और वज़न दोनों अच्छे से बढ़ते हैं और बच्चे के कुपोषित होने की संभावना बहुत कम हो जाती है।
जिला कार्यक्रम अधिकारी मथुरा
7455095736
Author: Vijay Singhal
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