हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा में गाजियाबाद से आई सीबीआइ टीम ने बुधवार को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के कर्मचारी को 50 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों दबोच लिया। पकड़ा गया रविंद्र कुमार मल्टी टास्किंग स्टाफ के पद पर कार्यरत था। जनवरी में दिल्ली से स्थानांतरित होकर आया था। कंकाली देवी में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) का कार्यालय है। मोतीकुंज स्थित प्राचीन कोस मीनार एएसआइ द्वारा संरक्षित है। इससे लगभग 113 मीटर दूर अमोघ आचार्य का घर है। अमोघ अपने मकान में छत पर निर्माण करा रहे थे, इस पर रविंद्र कुमार ने उन्हें संरक्षित मीनार क्षेत्र के दायरे का हवाला देते हुए निर्माण रुकवा दिया। काम शुरू करने के लिए 50 हजार रुपये की डिमांड की। अमोघ ने इसकी शिकायत गाजियाबाद सीबाआइ कार्यालय में की। इसके बाद रिश्वतखोर कर्मचारी को रंगे हाथों पकड़ना तय किया गया।बुधवार को सुबह दस बजे सीबीआइ की टीम शहर पहुंची और अमोघ से मिलकर योजना तैयार की। सुबह साढ़े दस बजे अमोघ ने रविंद्र को चंदनवन पैसे लेने के लिए बुलाया। रविंद्र के पहुंचते ही अमोघ ने नोटों की गड्डी थमा दी। पैसे लेने के बाद रविंद्र आराम से निर्माण करने की कह रहा था, तभी सीबीआइ की टीम ने उसे दबोच लिया। नोटों में लगा पाउडर रविंद्र के हाथ में लग चुका था। कागजी कार्रवाई के बाद सीबीआइ उसे गाजियाबाद ले गई। स्थानीय पुलिस ने जानकारी से इनकार किया है। एएसआइ के कार्यालय में इसकी भनक लगते ही खलबली मच गई। अमोघ ने बताया कि कोस मीनार के बारे में जानकारी होने के बाद से रविंद्र किसी को भी यहां पर मकान नहीं बनाने देता था, जो कोई मकान बनाने को कोशिश करता तो रुपये की मांग करता था।
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Author: Vijay Singhal
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