हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। बलदेव छठ के कार्यक्रमों की शुरुआत भगवान श्री कृष्ण के बड़े भाई बलराम जी की नगरी में पूजा अर्चना के साथ हुई। यहां सुबह से ही मंगल बधाई गीत गाए गए। दोपहर को 11 सौ किलो पंचामृत से अभिषेक किया गया। भगवान बलराम जी का अभिषेक होते ही सभी जगह बलदेव जी के जयकारे लगने लगे। गर्ग संहिता के अनुसार बलदेव खंड में शेष अवतार बलदेव के जन्म की कथा बड़ी रोचक है। देवकी के सातवें गर्भ से भगवान का अनंत आगमन हुआ। वासुदेव की दूसरी पत्नी रोहिणी कंस के भय से गोकुल में रहती थी । योग माया ने भगवान को देवकी के उदर से खींचकर रोहिणी के गर्भ में स्थापित किया। 5 दिन बाद भाद्रपद मास,शुक्ल पक्ष षष्टि को स्वाति नक्षत्र गुरुवार मध्यान्ह तुला लग्न 5 ग्रह उच्च स्थिति थे ,उस समय रोहिणी के गर्भ से शेषावतार बलदेव जी का अवतरण हुआ। भगवान बलदेव का अवतरण होते ही मेघों ने जल बरसाए और देवताओं ने पुष्पों की वर्षा की। बलराम जी की नगरी बलदेव मथुरा जिले मुख्यालय से 20 किलोमीटर दूर स्थित है। जहां बलराम जी का विशाल मंदिर बना हुआ है ।मंदिर में 8 फीट ऊंचा साढ़े तीन फीट चौड़ा, श्यामवर्ण ,शेषनाग छाया, विग्रह, नृत्य मुद्रा में दाहिने हाथ सिर से ऊपर भारत मुद्रा में बाएं हाथ में चषक ,विशाल नेत्र भुजाएं आभूषण धारण किए हुए कलाई में कडाउ है ।पैरों में आभूषण कट,धोती पहने मूर्ति के कान में कुंडल कंठ में वैजयंती माला है। मूर्ति के सिर के ऊपर से तीन बलय हैं जो विग्रह की शोभा को बढ़ा रहे हैं। मान्यता है कि बलराम जी शेषावतार हैं । त्रेतायुग के समय वह भगवान राम के लघु भ्राता लक्ष्मण के रूप में अवतरित हुए थे ।वहीं कृष्ण अवतार में बड़े भाई के रूप में अवतरित हुए। दाऊजी महाराज को प्रतिदिन भोग में माखन, मिश्री ,खीर पूरी, भांग, दूध,बीड़ा चढ़ाया जाता है । भगवान बलदेव को ही ब्रज का राजा कहा जाता है। वृंदावन में स्थित बड़े दाऊजी मन्दिर में भगवान बलभद्र जी का भव्य प्राकट्य उत्सव धूमधाम के साथ मनाया गया। दाऊजी महाराज का भव्य महा अभिषेक किया गया। जिसमें दूध, दही, शर्करा, घी, शहद आदि के साथ-साथ जड़ी बूटियों का प्रयोग किया गया। कार्यक्रम की जानकारी देते हुए मंदिर के सेवायत आचार्य दीपक गोस्वामी ने बताया कि श्रीधाम वृंदावन में यह विग्रह अत्यंत प्राचीन विग्रह है। भगवान श्री कृष्ण के प्रपोत्र पद्मनाभ जी के द्वारा दाऊजी की मूर्ति का निर्माण कराया गया था। यह दिव्य और भव्य प्रतिमा अत्यंत सिद्ध है। दाऊ दयाल जी को ब्रज का राजा कहा जाता है। अतः आज के दिन दाऊ जी के चरणों मे जो भी मनोकामना समर्पित करता है वह पूरी होती है।
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Author: Vijay Singhal
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