हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। कृष्ण की नगरी में सालों से सिसक रही यमुना की प्रशासन को सुध आ गई है। यमुना की दुर्दशा देख मथुरा के डीएम ने इसके शुद्धिकरण की पहल शुरू की है। डीएम ने आम नागरिकों के साथ संवाद कर इसकी स्थिति सुधारने के लिए सुझाव मांगे। संवाद कार्यक्रम में नागरिकों में शिकायत के साथ सुझाव भी दिए। इस दौरान डीएम ने कहा बिना जन सहयोग के वह इस कार्य को पूरा नहीं कर सकते। भगवान श्री कृष्ण की पटरानी और सूर्य पुत्री यमुना इन दिनों अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रही है। यमुना का जल इस कदर प्रदूषित हो चुका है कि लोग अब आचमन करने से भी कतराते हैं। जबकि 15 वर्ष पहले तक यमुना जल से मंदिरों में भगवान का अभिषेक किया जाता था। जिलाधिकारी पुलकित खरे ने कलेक्ट्रेट सभागार में यमुना संवाद कार्यक्रम आयोजित किया। यमुना संवाद के दौरान डीएम ने कहा कि ब्रजवासियों के सहयोग एवं जन सहभागिता के माध्यम से यमुना का शुद्धीकरण किया जा सकता हैै। सभी को यमुना के शुद्धीकरण हेतु आगे आना होगा तथा यमुना की प्रवाह को अविरल बनाने का प्रयास करना होगा। यह सब तभी संभव है जब सभी का सहयोग होगा। जिलाधिकारी ने कहा कि जब जागो तभी सवेरा होता है, इसलिए हमें मिलकर यह कार्य प्रारम्भ करना है और यमुना मैया को स्वच्छ बनाना है। नगर निगम मथुरा वृंदावन में यमुना का प्रवाह लगभग 16 किमी है। जिसमें दोनों धार्मिक नगरी में कई प्रसिद्ध घाट हैं। यहां 36 नाले हैं जिसमें से नगर निगम और सिंचाई विभाग का दावा है कि 31 नाले टैप कर दिए गए हैं यानि इनके जरिए गंदा पानी यमुना में नहीं गिर रहा। जबकि 5 नाले जल्द टैप करने की प्रक्रिया चल रही है। हालांकि नगर निगम,सिंचाई विभाग के इन दावों की हकीकत कुछ और है। कार्यक्रम में नगर आयुक्त अनुनय झा ने बताया कि यमुना के घाटों की सफाई के लिए 38 सफाई कर्मी हैं। जिसमें से 16 वृंदावन में और 22 मथुरा में। नगर आयुक्त अनुनय झा ने बताया कि पहले नमामि गंगे योजना के तहत 60 सफाई कर्मी थे लेकिन पिछले वर्ष से यह सफाई कर्मी काम नहीं कर रहे। इसके लिए 3 बार पत्र भी लिखा है। लेकिन इस पर कोई अमल नहीं हुआ। कार्यक्रम में सामाजिक संस्था विश्व धर्म रक्षक दल ने बताया कि यमुना में 360 एमएलडी गंदा पानी गिरता है। जिसमें से 101 एमएलडी गंदा पानी नगर निगम क्षेत्र में गिरता है। यहां केवल 76 एमएलडी गंदा पानी ही यमुना में गिरने से रोका जा रहा है। संवाद कार्यक्रम में यमुना भक्त मुकेश चतुर्वेदी ने कहा कि यमुना की सफाई के लिए सबसे आवश्यक है कि ओखला बैराज से आने वाला गंदा पानी मथुरा के एंट्री पाइंट कोटवन से पहले कोई तकनीक प्रयोग कर रोका जाए। संवाद में जनपद वासियों, पत्रकार, समाज सेवियों, गणमान्य व्यक्तियों, प्रबुद्धजनों, एनजीओ आदि ने अपने अपने सुझाव तथा जानकारी सांझा की। जिसमें यमुना की सफाई, प्रदूषण से मुक्ति, अविरल धारा आदि के संबंध में अपने विचार रखे। संवाद कार्यक्रम में योगेंद्र चतुर्वेदी ने सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के सही से संचालन पर सवाल खड़े किए। इसके अलावा ट्रीटमेंट प्लांट की गुणवत्ता की जांच कराने का सुझाव रखा। जिस पर जिलाधिकारी ने कहा कि सभी 7 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की जांच की जायेगी।कार्यक्रम में जिलाधिकारी पुलकित खरे ने कहा कि टैप नालों की गुणवत्ता चेक करनी होगी तथा आरओ पॉल्यूशन को निर्देश दिए की सभी नालों की जांच नियमित रूप से कराना सुनिश्चित करें। संवाद में लोगो ने कहा कि पूरे मथुरा वृंदावन के नालों को एक बड़े पाइप के माध्यम से गोकुल के आस पास एसटीपी प्लांट बनाकर शुद्ध किया जाए। जिस पर जिलाधिकारी ने जल निगम को उक्त योजना पर प्रस्ताव बनाने के निर्देश दिए और कहा कि इसे दिखवा ले कि यह सफल है या नही। उन्होंने जल निगम से यह भी कहा की क्या किसी और जनपद में एसा हुआ है या नही, इसकी भी जानकारी प्राप्त कर लें। यमुना में हो रहे प्रदूषण को रोकने की सबसे बड़ी जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की है। संवाद में डीएम ने जब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों से पूछा कि क्या वह एंट्री और एक्जिट प्वाइंट पर यमुना के जल में ऑक्सीजन की मात्रा कितनी है इसकी जांच करते हैं तो वह बगलें झांकने लगे। इसके अलावा यह भी नहीं बता सके कि यमुना में प्रदूषण किस लेबल का है। जिलाधिकारी ने जल निगम, सिंचाई विभाग तथा नगर निगम के अधिकारियों को निर्देश दिए कि घाटों के पास सिल्ट सफाई का कार्य नियमित रूप से करें। जिससे यमुना जी का फ्लो अच्छा हो सके और यमुना जी साफ सुथरी दिखे। जिलाधिकारी ने आरओ पीसीबी को निर्देश दिए कि यमुना जी का बीओडी तथा केमिकल इत्यादि की जांच 3 स्थानों पर कराना सुनिश्चित करें, जिसमें कोसीकलां, गोकुल तथा फरह में सैंपल लिए जाएं।
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Author: Vijay Singhal
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