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अधिवक्ताओं ने महिला थाने के बाहर दिया धरना, एसपी सिटी से नोकझोंक

ByVijay Singhal

Jun 16, 2023
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हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। महिला थाना प्रभारी निरीक्षक की कार्यप्रणाली से आक्रोशित अधिवक्ता सड़क पर उतर आए। पुलिस अधिकारियों के न पहुंचने पर आक्रोशित अधिवक्ताओं ने महिला थाने के बाहर धरना देकर आगरा-मथुरा रोड पर जाम लगा दिया। बाद में पहुंचे अधिकारियों ने समझा बुझाकर उन्हें शांत किया। इस बीच एसपी सिटी से अधिवक्ताओं की तीखी नोकझोंक भी हुई। करीब 15 मिनट तक जाम लगा रहा। बृहस्पतिवार सुबह बड़ी संख्या में अधिवक्ता महिला थाने के सामने पहुंच गए और थाना प्रभारी निरीक्षक के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। अधिवक्ताओं का आरोप था कि प्रभारी निरीक्षक ने थाने में पिछले तीन दिन से अधिवक्ताओं का प्रवेश बंद कर दिया है। इसके कारण उन्हें परेशानी हो रही है। इससे पहले भी थाना प्रभारी निरीक्षक की शह पर स्टाफ अधिवक्ताओं से अभद्र व्यवहार करता रहा है। जूनियर अधिवक्ता जब थाने में मुकदमे से संबंधित जानकारी करने के लिए जाते हैं उन्हें जानकारी नहीं दी जाती है। महिला उत्पीड़न की शिकायत लेकर जब वह मुकदमा दर्ज कराने के लिए थाने जाते हैं तो उनकी सुनवाई नहीं होती है। उनके साथ आने वाले पीड़ित की भी सुनवाई नहीं की जाती है। पिछले काफी समय से महिला थाना प्रभारी का अधिवक्ताओं के साथ यही रवैया है। इसकी शिकायत वह एसएसपी समेत अन्य अधिकारियों से भी कर चुके हैं, लेकिन अधिकारियों ने कोई कदम नहीं उठाया। अधिकारियों की निंद्रा तोड़ने के लिए धरना प्रदर्शन और रोड जाम करना आवश्यक था। इधर, जाम के कारण वाहनों की लाइन लग गई। यह थी अधिवक्ताओं की प्रमुख मांग

1. महिला थाने में किसी अधिवक्ता को रोका नहीं जाए। 2. वाद-विवाद का जो रजिस्टर है उसकी प्रतिलिपि बाहर रहेगी ताकि अधिवक्ताओं को मुकदमे की जानकारी में आसानी हो। 3. किस मुकदमे में जांच चल रही है, चार्जशीट लगी है या एफआर लगी है, इसकी जानकारी महिला थाना पुलिस अधिवक्ताओं को देगी। 4. महिला थाना प्रभारी निरीक्षक को मिलने से किसी भी अधिवक्ता को नहीं रोका जाएगा।

एमपी सिंह, एसपी सिटी ने कहा, महिला थाने से संबंधित समस्याओं का निस्तारण न होने के कारण अधिवक्ताओं ने जाम लगाया था। उनकी चारों मांगों का जल्द समाधान हो जाएगा। अलका ठाकुर, महिला थाना प्रभारी निरीक्षक ने कहा, किसी भी अधिवक्ता को थाने में आने से रोका नहीं गया है। कई बार एक-एक पीड़ित के साथ कई-कई अधिवक्ता आते हैं इसके कारण कार्य प्रभावित होता है। आरोप निराधार हैं।

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