हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। भूतेश्वर से कृश्णानगर तक विशेष रूप से आकर्षक बनाए जाने की योजना है। निगम, प्रशासन के आदेश पर दुकानों के बोर्ड एक ही कलर में बनाए जा रहे हैं। जिससे वे सुंदर और समरूप लगें। जयपुर में यह प्रयोग बहुत पहले हुआ था। पिंक सिटी में एक जैसे शाइन बोर्ड बनाए गए थे। मथुरा में भी होलीगेट अंदर कुछ साल पहले एक जैसे लाल बोर्ड बनाने की पहल हुई थी।अब भूतेश्वर से यह कार्य हो रहा है। शायद इसीलिए काला रंग रखा गया है। संभव है भूतों को काला रंग बहुत पसंद हो। एक भाई साहब सर खुजाकर बता रहे थे कि शायद इस चौराहे के पास शनिदेव की मूर्ति रखी जाने का विचार हो। नहीं तो काले काले बोर्डों से कौन सी सुंदरता दिख रही है। रखने थे तो केसरिया रखते। धार्मिक नगरी में भगवा ही होना चाहिए। लेकिन तब शायद कोई कांग्रेसी दुकानदार बीजेपी का प्रचार बताकर एतराज कर देता तो, बात का बतंगड़ बन जाता। नीले रंग में रखते तो बसपा का प्रचार होता। लाल से कॉमरेड हो जाने का खतरा था। इसलिए बहुत सोच विचारकर काला रंग रखा होगा। समरूपता ही तो करनी है, अच्छा लगे ना लगे, इसमें फ़र्क नहीं पड़ना, वैसे भी भूतेश्वर से मसानी चौराहे तक धूप में पैदल चलते राहगीर ही बाजार की शौभा बढ़ाते अच्छे लगते हैं। इसके लिए प्रशासन ने विशेष रूप से ई रिक्शा, टेंपो बंद करके जो महान कार्य किया है। वो काबिले तारीफ है। बाहर से आए यात्री राहगीर जब अपनी अपनी मातृ भाषा में व्यवस्थापकों को कोसते हुए भीषण गर्मी में यहां पैदल चलते हैं तो मथुरा के अधिकारियों का कितना नाम रोशन होता है। ये यहां चौराहे पर छांव में बैठेने वाले पुलिसकर्मी भी नहीं बता सकते खैर, किसी भी तरह हर चौराहे को चमकाना है। चाहें इसके लिए दुकान के बोर्डों के साथ अपने चेहरे पर भी कालिख क्यों न पोतनी पड़े।
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Author: Vijay Singhal
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