हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि 30 मई मंगलवार को गंगा दशहरा मनाया जाएगा। स्थानीय ब्रजवासी गंगा स्नान करने के लिए जाने के साथ यमुना स्नान को भी महत्वपूर्ण मानते हैं। इसके लिए यमुना में 1006 क्यूसेक गंगाजल छोड़ा गया है। ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि 29 मई को रात 11 बजकर 49 मिनट से शुरू होगी और इसका समापन 30 मई को दोपहर एक बजकर सात मिनट पर होगा। गंगा दशहरा पर्व के लिए उदया तिथि के अनुसार दिन तय किया जाता है, इसलिए यह पर्व मंगलवार के दिन मनाया जाएगा। हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार, गंगा दशहरा के दिन मां गंगा धरती पर अवतरित हुई थीं। इसीलिए इस तिथि को गंगा दशहरा का पर्व मनाया जाता है। इस दिन लोग गंगा नदी में स्नान करते हैं और दान देते हैं। कहा जाता है कि इस दिन गंगा में स्नान करने से 10 तरह के पाप मिट जाते हैं। वहीं ब्रजवासी गंगा में स्नान करने तो जाते ही हैं, यमुना में स्नान को भी महत्वपूर्ण मानते हैं। इसके चलते यमुना में गंगाजल छोड़ा जा रहा है। हिंदूवादी नेता गोपेश्वरनाथ चतुर्वेदी ने बताया कि गंगा दशहरा पर यमुना स्नान के लिए यमुना में गंगाजल छोड़ा गया है। इसमें 352 क्यूसेक गंगाजल ओखला से, 504 क्यूसेक गंगाजल कोर्ट स्कैप बुलंदशहर से और 150 क्यूसेक गंगाजल हरनौल मांट से छोड़ा गया है। इस तरह करीब 1 हजार क्यूसेक से अधिक पानी इस समय यमुना में अतिरिक्त चल रहा है। जिलाधिकारी पुलकित खरे से वार्ता हुई है तो अभी और पानी बढ़ने की भी उम्मीद है। इस तरह ब्रजवासी साफ, स्वच्छ और निर्मल यमुना में स्नान लाभ ले सकेंगे।
नगर निगम द्वारा एक सप्ताह से यमुना के घाटों की सफाई करा रहा है। गंगा दशहरा के दिन खोया पाया शिविर लगाया जाएगा। महिलाओं के कपड़े बदलने के लिए चेजिंग रूम बनेंगे। बैरीकेडिंग भी लगा दी गई हैं। जो नाले टेप हैं। वहां पंप स्टेशन लगातार चालू है। हिंदू धर्म में गंगा स्नान और दान का हमेशा से महत्व रहा है, लेकिन गंगा दशहरा के दिन गंगा स्नान करने और दान देने से व्यक्ति को सभी दुखों से मुक्ति मिल जाती है। स्कंद पुराण में कहा गया है कि गंगा दशहरा के दिन व्यक्ति को किसी भी पवित्र नदी में जाकर स्नान, ध्यान और दान करना चाहिए। इससे व्यक्ति को अपने सभी पापों से मुक्ति मिल जाती है। कहा जाता है कि गंगा दशहरा के दिन स्नान के बाद दान अवश्य करना चाहिए। मान्यता है कि इन चीजों के दान से सभी पाप नष्ट हो जाते हैं। दान करने से ग्रहों की पीड़ा से भी मुक्ति मिलती है। इस दिन सामर्थ्यानुसार, जल, अन्न, फल, वस्त्र, पूजन व सुहाग सामग्री, घी, नमक, तेल, शक्कर और स्वर्ण का दान करने से पुण्य लाभ मिलता है।
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