हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा के गोवर्धन में रह रहे भागवत के पिता पेशे से इंजीनियर हैं। भागवत इस्कॉन के संस्थापक भक्ति वेदांत प्रभु पाद जी से प्रेरित है। भागवत ए से अर्जुन, बी से बलराम, सी से चैतन्य और डी से दामोदर के अलावा जेड तक इसी तरह हर अक्षर में भगवान का नाम बताते है। गिव गीता गुरुकुल में पढ़ रहे भागवत ने बताया, “गीता जीवन का सार है।गीता ज्ञान का भंडार है। भगवान कृष्ण ने अर्जुन से कहा था कि हर इंसान के जीवन में जन्म मरण के चक्र को जान लेना बेहद आवश्यक है। मुझसे प्रभुपाद जी ने कहा है कि कृष्ण भक्ति करो। 3 वर्ष 3 महीने का नटखट भागवत बताते हैं कि उन्होंने भगवान श्री कृष्ण से वादा किया था। भागवत के अनुसार यह वादा उन्होंने तब किया जब वह मां के गर्भ में था। भागवत ने बताया कि उसने प्रॉमिस किया था कि जब वह संसार में आएगा तो भगवान कृष्ण की बहुत भक्ति करेगा।
मूल रूप से गुरुग्राम के रहने वाले भागवत के पिता अकाम भक्ति दास ने बताया कि जब भागवत 1 वर्ष का था तब श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर्व पर उसकी कृष्ण भक्ति नजर आई। इसके बाद जैसे जैसे उम्र बढ़ी तो उसने अपने अंदाज में कृष्ण भक्ति की। भागवत के पिता का मानना है कि आध्यात्मिक ज्ञान होना व्यक्ति के जीवन में जरूरी है। खेलने की उम्र में आध्यात्मिक ज्ञान भागवत की प्रतिभा को विलक्षण बनाता है। भागवत न केवल एबीसीडी,गीता आदि के बारे में बताता है बल्कि मृदंग बजाते हुए महामंत्र का भी बड़े सुंदर अंदाज में गायन करता है। भागवत के इस अंदाज को जो भी कोई देखता है वह उसका कायल हो जाता है।किसी ने ठीक ही कहा है कि प्रतिभा उम्र की मोहताज नहीं होती, यह किसी भी उम्र के व्यक्ति में हो सकती है। ऐसे ही प्रतिभा के धनी तीन साल तीन महीने के भागवत चर्चा में है। भागवत ने ABCD की परिभाषा ही बदल डाली है। वह ABCD में A से Z तक में भगवान के नाम तलाश ली हैं। उन्होंने A फॉर एप्पल और B फॉर बॉल की जगह A फॉर अर्जुन और B फॉर बलराम (श्री कृष्ण के भाई) के नाम तलाशी है।
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Author: Vijay Singhal
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